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Friday, February 2, 2024

पहले ओलंपियन सुखबीर सिंह गिल की स्मृति में प्रेस निमंत्रण

हॉकी स्टेडियम में एक स्मृति हॉकी मैच 3 फरवरी को 


चंडीगढ़
: 2 फरवरी 2024: (कार्तिका कल्याणी सिंह//खेल स्क्रीन ब्यूरो)::

हम पहले ओलंपियन सुखबीर सिंह गिल की स्मृति में तीन फरवरी को एकत्रित हो रहे हैं। गौरतलब है कि उनका  ब्रायन कैंसर के कारण 47 साल की उम्र में निधन हो गया था। उनके श्रद्धांजलि समारोह और भोग समारोह में भाग लेने के लिए चंडीगढ़ के सभी मीडिया कर्मियों और संस्थानों को इसमें भाग लेने और कवरेज करने की गुजारिश है। इसके साथ ही नागरिकों से भी हम अनुरोध करते हैं कि वे भी इसमें बढ़ चढ़ कर भाग लें। 

चंडीगढ़ के सेक्टर 42 स्थित हॉकी स्टेडियम में सुबह 11:00 बजे दिनांक 03 फरवरी को उनकी स्मृति में एक हॉकी मैच का आयोजन होगा। हॉकी स्टेडियम 42 से गुरुद्वारा साहिब सेक्टर 49 तक श्रद्धांजलि मार्च भी निकलेगा जिसका रुट मार्गसेक्टर- 42-43-44-45-46-49 की आंतरिक सड़कों से होगा।  इसके बाद भोग और अंतिम ार्ड्स का आयोजन सेकतर 49 गुरुद्वारा के गुरुद्वारा साहिब में होगा। 

ब्रेन टयूमर के साथ संग्राम को लेकर उनका जीवन लगातार संघर्ष का जीवन बना रहा। सुखबीर सिंह गिल को दिसंबर 2006 में ब्रेन टयूमर की इस भयानक बीमारी का पता चल गया था। उन्हें कुछ समय से सांस लेने में भी दिक्कत हो रही थी। इससे पहले के खतरे को रोका जा सकता एक दिन अचानक उन्हें दौरा पड़ा और वह घर पर ही गिर पड़े। यह इस खतरे की गंभीर शिखर थी। परिजनों की तरफ से उन्हें उन्हें एक निजी क्लिनिक में ले जाया गया जहां सीटी स्कैन और एमआरआई परीक्षण की एक आवश्यक शृंखला के माध्यम से उन्हें ब्रेन ट्यूमर होने का पता चला। 

ब्रेन ट्यूमर का यह मामला बेहद गंभीर निकला। इसे ठीक करने के लिए कई बार ब्रेन की सर्जरी करवाई गई थीं लेकिन यह बीमारी बार बार सिर उठाने लगी। इसका स्थाई इलाज नहीं हो पाया। पहली सर्जरी उत्तर भारत के जानेमाने सर्वश्रेष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ. वीके काक ने की थी। उम्मीद थी ान उन्हें इससे पक्की राहत मिल सकेगी लेकिनट्यूमर का फिर से उभरना जारी रहा। 

इस के चलते ही ओपन स्कल ऑपरेशन और गामा नाइफ रेडियो सर्जरी सहित विभिन्न जटिल चिकित्सा प्रक्रियाओं की आवश्यकता भी पड़ी। बीच में जब वह आंशिक रूप से ठीक हो गए तो वह स्कल कैप के साथ खेल के मैदान में लौटे और प्रीमियर हॉकी लीग में खेले। 

इसी तरह सं 2021 में आखिरी चिकित्सा प्रक्रिया ने उन्हें पूरी तरह से बिस्तर पकड़ने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने घरेलू हॉकी में भारत पेट्रोलियम का प्रतिनिधित्व किया और इसी में नौकरी की। भारत पेट्रोलियम ने ही गिल को सभी चिकित्सा सहायता प्रदान की और प्रमुख और महंगी सर्जरी और चिकित्सा प्रक्रियाओं के लिए अधिकांश चिकित्सा बिल उठाए। इस तरह उन्हें बचाने की निरंतर कोशिशें की गईं। उन्हें बचाने के सभी प्रयास नाकाम रहे। 47/48 वर्ष की उम्र में वह उस सफर पर रुखसत हो गए जहां से कोई नहीं लौटता। अब उनकी यादें शेष हैं। जिन जिन स्थानों से उनका लगवा और अनजाना रहा वहां के  अब भी महसूस होते हैं। 

उल्लेखनीय है कि चंडीगढ़ से ही शुरू हुआ था श्री गिल का हॉकी के साथ ऐतिहासिक इश्क़ का सफर। यहाँ की सडकें,यहाँ के इलाके, यहाँ के लोग उनके साथ भावनात्मक तौर पर भी जुड़े हुए थे। इसी हवा में  ली थी। यह अखिरो सांसों तक जारी भी रहा। सुखबीर गिल के हॉकी के खेल के शुरुआती दिनों में सेक्टर-41 में शिवालिक पब्लिक स्कूल में अपने हाॅकी के खेल को निखारा और बाद में सेक्टर-10 में डीएवी कॉलेज चले गए। उन्होंने भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की करने से पहले अखिल भारतीय अंतर-विश्वविद्यालय हॉकी चैंपियनशिप में पंजाब यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व किया। संन्यास लेने के बाद गिल ने मोहाली के शिवालिक पब्लिक स्कूल में एक अकादमी चलाई और उभरते और पेशेवर खिलाड़ियों को मंच प्रदान करने के लिए हर साल हॉकी चैंपियनशिप का आयोजन किया। 

उनकी सांसें रुक गई। उम्र की पूँजी भी खत्म हो गई लेकिन उनसे जुड़ें बातें अब भी हमारे ज़हन में हैं। उनकी प्रेरणा लगातार चलती रहेगी।  महफिलों में उनकी चर्चा बानी रहेगी। भारत पेट्रोलियम का प्रतिनिधित्व करने के अलावा चंडीगढ़ टीम के नियमित सदस्य रहे। वह सिडनी ओलंपिक (2000), कुआलालंपुर में हॉकी विश्व कप (2002) और 2002 में कोलोन (जर्मनी) में एफआईएच चैंपियंस ट्रॉफी में भारतीय टीम की ओर से खेले।उनका खेल नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत बना रहेगा। 

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Friday, June 10, 2022

पंजाब के लड़कों ने प्रतिष्ठित हॉकी स्वर्ण पदक जीता

प्रविष्टि तिथि: 10 JUN 2022 5:36 PM by PIB Delhi

कर्नाटक के बोरजी और राजस्थान के कस्वां ने रोड रेसिंग गोल्ड पर कब्जा किया

पंजाब ने पिछले संस्करणों में दो बार शिकस्त खाने के बाद शुक्रवार को खेलो इंडिया यूथ गेम्स में बहुप्रतीक्षित हॉकी का प्रतिष्ठित स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया है।

आज सुबह कर्नाटक ने पदक तालिका में चौथा स्थान प्राप्त करने के उद्देश्य से शानदार स्वर्ण पदक जीतने के लिए तेज साइकिल चलाई।

कर्नाटक की चैत्र बोरजी ने गर्ल्स रोड साइक्लिंग टाइम ट्रायल 20 किलोमीटर (32: 51.84 सेकंड) में 11वां स्वर्ण अपने नाम किया, यह पदक उन्हें अपने तैराकों से आगे ले गया, जिन्होंने अब तक तरणताल से 8 गोल्ड मेडल बाहर निकाले हैं।

हरियाणा (33) और महाराष्ट्र (32) को सुबह के सत्र के दौरान अपनी पिछली शाम के सर्वोच्च स्थान पर बने रहने के लिए कोई भी स्वर्ण पदक नहीं मिला।

लद्दाख की टीम में अकेली महिला साइकिल चालक लीक्ज़ेस एंगमो ने केंद्र शासित प्रदेश को खेलों का इसका पहला पदक जीतने में मदद की, जो बोरजी के बाद 33:52.52 के समय के साथ दूसरे स्थान पर रही। राजस्थान के मुकेश कस्वां ने जम्मू-कश्मीर के आदिल अल्ताफ से आगे रहते हुए 30 किलोमीटर बॉयज टाइम ट्रायल जीत लिया।

ब्लू हॉकी टर्फ पर पंजाब ने रोमांचक फाइनल में उत्तर प्रदेश को 3-1 से हराने के लिए भरत ठाकुर के ब्रेस पर सवार होकर फाइनल में प्रवेश किया था।

भरत ठाकुर ने (चौथे तथा 47वें) और राजिंदर सिंह ने अपने 5वें पेनल्टी कार्नर को गोल में बदलकर राष्ट्रीय चैंपियन के प्रयासों को रोक दिया। मजबूत टीम उत्तर प्रदेश ने 10 पेनल्टी कार्नर अर्जित किए, लेकिन 11वें मिनट में ड्रैग-फ्लिकर कप्तान शारदा नंद तिवारी के माध्यम से केवल एक को ही गोल में बदला जा सका, जो केवल बराबरी पर आने के लिए ही पर्याप्त था।

पंजाब के उत्साही कोच युधविंदर सिंह ने कहा कि हम दो बार पोडियम से रजत और कांस्य के साथ वापस लौटे थे, लेकिन आज हमारे लड़कों ने अच्छी हॉकी का प्रदर्शन किया और सफलता अर्जित की।

ओडिशा ने झारखंड को 8-0 से हराकर कांस्य पदक जीता।

इस बीच, तमिलनाडु की लड़कियों ने मेजबान हरियाणा को 3-2 से हराकर झारखंड के खिलाफ होने वाले दिलचस्प फाइनल में प्रवेश किया, झारखंड ने गुजरात को 3-0 से मात दी।

निशा और आरती के स्ट्राइक की बदौलत तमिलनाडु ने हाफटाइम में मेजबान टीम को 2-0 की बढ़त के साथ आगे बनाये रखा। लेकिन ए महालक्ष्मी ने खेल फिर से शुरू होने पर एक ब्रेस बनाया और आर युवा रानी ने विजेता स्कोर करने तथा मेजबानों के सपने को तोड़ने के लिए अतिरिक्त समय में एक ढीली गेंद पर उछाल दिया।

तीरंदाजी में, टॉप्स विकास दस्ते के एथलीट पार्थ सालुंके ने लड़कों की रिकर्व स्पर्धा में शीर्ष स्थान हासिल किया, जिसमें चंडीगढ़ के दिव्यांश कुमार और पश्चिम बंगाल के जुयल सरकार क्रमशः दूसरे तथा तीसरे स्थान पर रहे।

कंपाउंड गर्ल्स में, राजस्थान की प्रिया गुर्जर ने क्वालिफिकेशन स्टैंडिंग में शीर्ष स्थान हासिल किया, उसके बाद पंजाब की प्रणीत कौर और अवनीत कौर का स्थान रहा।

हरियाणा के पंचकुला में आयोजित खेलो इंडिया यूथ गेम्स के गर्ल्स इंडिविजुअल टाइम ट्रायल 20 किलोमीटर की पदक विजेता

परिणाम सभी फाइनल (सुबह सत्र)

जी: स्वर्ण; एस: रजत ; बी: कांस्य

साइकिलिंग

गर्ल्स इंडिविजुअल टाइम ट्रायल 20 किलोमीटर: जी: चैत्र बोरजी (कर्नाटक) 32: 51.84; एस: लीक्ज़ेस एंगमो (लद्दाख) 33:52.52; बी: रवीना बिश्नोई (राजस्थान) 33:57.27

हरियाणा के पंचकुला में आयोजित खेलो इंडिया यूथ गेम्स बॉयज इंडिविजुअल टाइम ट्रायल 30 किलोमीटर के पदक विजेता

लड़कों का व्यक्तिगत टाइम ट्रायल 30 किलोमीटर: जी: मुकेश कस्वां (राजस्थान) 38: 38.63; एस: आदिल अल्ताफ (जम्मू और कश्मीर) 39: 22.69; बी: परमा राम (राजस्थान) 39:48.32


खेलो इंडिया यूथ गेम्स में लड़कों की हॉकी के फाइनल में पंजाब की हॉकी टीम अपनी जीत का जश्न मना रही है

हॉकी

लड़के

फाइनल: पंजाब ने उत्तर प्रदेश को 3-1 से हराया

कांस्य: ओडिशा ने झारखंड को 8-0 पराजित किया

अन्य प्रमुख परिणाम:

फुटबॉल (लड़कियां)

सेमी - फाइनल 1: झारखंड ने गुजरात को 3-0 से शिकस्त दी

सेमी - फाइनल 2: तमिलनाडु ने हरियाणा को 3-2 से पराजित किया

टेनिस

लड़कों का सिंगल्स:

1. रुशिल खोसला (उत्तर प्रदेश) ने दक्ष प्रसाद (मध्य प्रदेश) को 6-2; 6-2 से हराया

2. ध्रुव हिरपारा (गुजरात) ने पर्व नागे (हरियाणा) को 6-3; 6-4 से पराजित किया

लड़कियों का सिंगल्स:

1. सुहिता मारुरी (कर्नाटक) ने श्रुति अहलावत (हरियाणा) को 2-6; 6-1; 7-6 से मात दी

2. आकांक्षा नितुरे (महाराष्ट्र) ने वैष्णवी अदकर (महाराष्ट्र) को 6-2; 6-4 हराया  

(PIB)  ****  एमजी/एएम/एनके/सीएस

Sunday, August 22, 2021

ओलंपिक पदक जीतने वाले खिलाडियों का विशेष सम्मान: विजय इंदर सिंगला

 Sunday: 22nd August 2021 at 8:06 PM

पंजाबी हॉकी खिलाडिय़ों को समर्पित किये 10 सरकारी स्कूलों के नाम

ओलंपिक खिलाडिय़ों के नाम पर स्कूलों के नाम रखे जाने से विद्यार्थियों को खेल में आगे आने के लिए मिलेगी प्रेरणा: स्कूल शिक्षा मंत्री

चंडीगढ़: 22 अगस्त 2021: (खेल स्क्रीन//पंजाब स्क्रीन)::

पंजाब के स्कूल शिक्षा और लोक निर्माण मंत्री श्री विजय इंदर सिंगला ने रविवार को बताया कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की तरफ से ओलंपिक पदक विजेता हॉकी खिलाडिय़ों के सम्बन्धित क्षेत्रों के स्कूलों के नाम इन खिलाडिय़ों को समर्पित किये हैं।

श्री विजय इंदर सिंगला ने बताया कि मुख्यमंत्री ने टोक्यो ओलंपिक-2020 में काँस्य पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के 11 पंजाबी खिलाडिय़ों के नाम पर स्कूलों के नाम रखने की मंजूरी दे दी है।

मंत्री ने कहा कि सरकारी सीनियर सेकंडरी स्कूल (जी.एस.एस.एस) मि_ापुर, जालंधर का नाम भारतीय हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह के नाम पर रखा गया है। उन्होंने कहा कि स्कूल अब ओलंपियन मनप्रीत सिंह सरकारी सीनियर सेकंडरी स्कूल मि_ापुर के नाम के साथ जाना जायेगा।

श्री विजय इंदर सिंगला ने बताया कि सरकारी सीनियर सेकंडरी स्कूल टिंमोवाल, अमृतसर का नाम उप कप्तान हरमनप्रीत सिंह के नाम पर रखा गया है जो ओलंपिक में भारत के लिए सबसे अधिक छह गोल दागने वाला भारतीय खिलाड़ी है। उन्होंने कहा कि अब यह स्कूल ओलंपियन हरमनप्रीत सिंह सरकारी सीनियर सेकंडरी स्कूल, टिंमोवाल के तौर पर जाना जायेगा।

श्री सिंगला ने बताया कि सरकारी प्राइमरी स्कूल मि_ापुर, जालंधर का नाम ओलंपियन मनदीप सिंह वरुण कुमार सरकारी प्राइमरी स्कूल मि_ापुर, जालंधर रखा गया है। उन्होंने बताया कि दोनों खिलाडिय़ों ने क्रमवार स्ट्राइकर और डिफेंस खिलाड़ी के तौर पर ओलंपिक के दौरान बहुत शानदार प्रदर्शन किया।

उन्होंने कहा कि सरकारी सीनियर सेकंडरी स्कूल अटारी, अमृतसर अब ओलंपियन समशेर सिंह सरकारी सीनियर सेकंडरी स्कूल अटारी के तौर पर जाना जायेगा, जिसने टूर्नामैंट के दौरान एक सफल मिडफील्डर के तौर पर बेहतरीन भूमिका निभाई।

कैबिनेट मंत्री ने बताया कि सरकारी मिडल स्कूल, बेसिक गर्लज़ फरीदकोट को ओलंपियन रुपिन्दरपाल सिंह सरकारी मिडल स्कूल, बेसिक गर्लज़ फरीदकोट का नाम दिया गया है। रुपिन्दरपाल ने भी टोक्यो ओलंपिक्स में 4 गोल किये थे।

उन्होंने कहा कि सरकारी मिडल स्कूल खुसरोपुर, जालंधर को ओलंपियन हार्दिक सिंह सरकारी मिडल स्कूल खुसरोपुर, जालंधर का नाम दिया गया है क्योंकि हार्दिक ने नॉक आउट पड़ाव में बहुत अहम भूमिका निभाई थी।

उन्होंने बताया कि सरकारी प्राइमरी स्कूल खलहिरा, अमृतसर का नाम ओलंपियन गुरजंट सिंह सरकारी प्राइमरी स्कूल खलहिरा, अमृतसर कर दिया गया है। इसी तरह सरकारी सीनियर सेकंडरी स्कूल बुताला, अमृतसर का नाम ओलंपियन दिलप्रीत सिंह सरकारी सीनियर सेकंडरी स्कूल बुताला रखा गया है। उन्होंने आगे कहा कि गुरजंट और दिलप्रीत दोनों भारतीय हॉकी टीम में स्ट्राइकर के तौर पर खेल रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकारी हाई स्कूल चाहल कलाँ, गुरदासपुर को ओलंपियन सिमरनजीत सिंह सरकारी हाई स्कूल चाहल कलाँ, गुरदासपुर का नाम दिया गया है। काँस्य पदक के मुकाबले में सिमरनजीत ने दो बहुत अहम गोल दागे थे।

उन्होंने बताया कि सरकारी सीनियर सेकंडरी स्कूल हुसैनपुर, आर.सी.एफ., कपूरथला को ओलंपियन कृष्ण बी. पाठक सरकारी सीनियर सेकंडरी स्कूल हुसैनपुर, आर.सी.एफ, कपूरथला का नाम दिया गया है। उन्होंने कहा कि पाठक भारतीय टीम में आरक्षित गोलकीपर के तौर पर शामिल थे।

श्री सिंगला ने कहा कि भारतीय खेल के क्षेत्र में पंजाब का सुनहरी योगदान है और इसने देश में ओलंपिक के लिए दूसरी सबसे बड़ी टीम भेजी थी क्योंकि कुल 124 खिलाडिय़ों में से 20 पंजाब के थे।

श्री सिंगला जो लोक निर्माण विभाग का कार्यभार भी संभाल रहे हैं, ने बताया कि इसके अलावा सम्बन्धित पदक विजेता खिलाड़ी के निवास या गाँव या क्षेत्र को जोडऩे वाली सडक़ों का नाम भी उन खिलाडिय़ों के नाम पर रखा जायेगा। उन्होंने कहा कि यह प्रयास विद्यार्थियों और अन्य नौजवानों को उनकी मनपसंद खेल में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करेगा।

Friday, August 6, 2021

अब खेलरत्न पुरस्कार का नाम होगा मेजर ध्यानचंद खेल रत्न

 हॉकी का जादूगर कहा जाता था मेजर ध्यान चंद को 

नयी दिल्ली: 6 अगस्त 2021: (खेल स्क्रीन ब्यूरो)::

भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान खेल रत्न पुरस्कार का नाम अब राजीव गांधी खेल रत्न नहीं बल्कि मेजर ध्यानचंद खेल रत्न होगा। भारतीय हॉकी टीमों के तोक्यो ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन के बाद इस सम्मान का नाम महान हॉकी खिलाड़ी के नाम पर रखने का फैसला लिया गया है। इसे एक बहुत बड़े फैसले के तौर पर देखा जा रहा है। गौरतलब है कि लोग मेजर ध्यान चंद को हॉकी का जादूगर कहते थे। एक किवदंती थी कि मेजर ध्यानचंद की हॉकी में कोई ऐसा चुंबक लगा हुआ होता है जिससे गेंद उस हॉकी के साथ साथ ही रहती है। हालाँकि ऐसा कुछ भी नहीं  था लेकिन आम लोगों के दिलों और दिमाग में कुछ ऐसी धारणा बन चुकी थी। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब यह घोषणा करते हुए कहा कि उन्हें देशवासियों के अनुरोध मिल रहे हैं कि खेल रत्न पुरस्कार का नाम मेजर ध्यानचंद के नाम पर रखा जाये तो बहुत से लोगों को मेजर ध्यान  चंद की वो भूली बिसरी  पुरानी कहानियां भी याद आ गईं। 

इस पर बाकायदा ट्वीट भी किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी ने इस पर बाकायदा ट्वीट किया ,"देश को गर्वित कर देने वाले पलों के बीच अनेक देशवासियों का ये आग्रह भी सामने आया है कि खेल रत्न पुरस्कार का नाम मेजर ध्यानचंद जी को समर्पित किया जाये। लोगों की भावनाओं को देखते हुए, इसका नाम अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार किया जा रहा है।"

इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि टोक्यो लंपिक में भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमों के प्रदर्शन ने पूरे देश को रोमांचित किया है। उन्होंने कहा कि अब हॉकी में लोगों की दिलचस्पी फिर से बढ़ी है जो आने वाले समय के लिये सकारात्मक संकेत है ।

गौरतलब है कि खेल रत्न सम्मान के तहत 25 लाख रुपये नकद पुरस्कार दिया जाता है। 

Tuesday, August 25, 2020

सपने सुहाने लड़कपन के जब सच होते हैं तो....

 अर्जुन अवार्ड जीतने वाली दीपिका को हर तरफ से बधाई 
नई दिल्ली: 25 अगस्त 2020:(खेल स्क्रीन ब्यूरो)::
रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला की जोशीली खिलाडी दीपिका अक्सर कमाल दिखाती रही है। इस बार उसने अर्जुन अवार्ड जीता है। एक गौरवपूर्ण उपलब्धि। दीपिका ने 2016 के ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम की अगवानी की थी। भारतीय रेलवे ने दीपिका की उपलब्धिओं पर गर्व व्यक्त किया है। 
भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी दीपिका ठाकुर का नाम देश के उन 29 खिलाड़ियों में शामिल हो गया है, जिन्हें अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया। इनके नाम की सिफारिश एक सप्ताह पूर्व मंगलवार को खेल मंत्रालय की पुरस्कार चयन समिति ने इस साल के अर्जुन पुरस्कार के लिए की थी। दीपिका ठाकुर भारतीय महिला हॉकी टीम की उपकप्तान दीपिका ठाकुर का नाम 2017 में भी अर्जुन अवार्ड के लिए चर्चा में था।
घर में न अमीरी थी न ही कोई बहुत बड़े अवसर। बस एक लगन लगी और जनून बन गई।दीपिका ठाकुर का जन्म बेहद साधारण परिवार में हुआ। बस दाल रोटी चल रही थी। इससे ज़्यादा की उड़ान तो सपने में भी सम्भव नहीं लगती थी। उनके स्वर्गवासी पिता राम नारायण ठाकुर यमुनानगर स्थित पेपर मिल में काम करते थे। जबकि मां ज्ञानती देवी गृहणी हैं। दीपिका का  बचपन पेपर मिल में ही व्यतित हुआ। लेकिन यहीं पर पैदा हुई बचपन से ही खेल में रूचि जो बढ़ती चली गई। पेपर मिल के मैदान में खिलाड़ियों को देख कर उसे अपने सपने और स्पष्ट दिखने लगते। वह उन सपनों के लिए ऊर्जा और जनून एकत्र करती रही। अपने लक्ष्य के लिए रास्ता तैयार करती रहीं। रास्ते आसान नहीं थे लेकिन वह अडिग रही। किसी मुसीबत से न घबराई। स्कूल में ही दीपिका ने हॉकी थाम ली थी। हॉकी घूमाते व खेलते देख सभी ने उसे कॉचिंग व ट्रेनिंग दिलवाने की बात कही। जिसके बाद दीपिका यमुनानगर में कोच दविंद्र साहनी के नेतृत्व में कोचिंग लेनी लगीं। आगे की पढ़ाई के लिए वह चंण्ड़ीढ़ चली गईं जो एक नया मोड़ भी साबित हुआ। 
हॉकी के [प्रति उसका जनून यहां भी ख्याति अर्जित करने लगा। कोच जसविंद्र सिंह ने दीपिका को तैयार किया। इस दौरान दीपिका ने कई डिस्ट्रिक, स्टेट और नेशनल मैच खेले और अपनी कुशलता साबित की। आखिर सन 2004 में वह पल आया जिसे दीपिका सहित परिजनों को बेसब्री से इंतजार था। दीपिका को अपनी मंजिल का पहला पड़ाव मिला और उनका चयन राष्ट्रीय टीम के लिए हुआ। उसकी उड़ान को सशक्त पंख मिले। उसके सपने साकार होते नज़र आने लगे। हर रोज़ नया आसमान नज़र आता। नै मंज़िलों के पटे मिलते। इस के बाद दीपिका ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। हर प्वाइंट पर फ्लो कर हिट करने का दम रखने वाली दीपिका 240 इंटरनेशनल मैच खेल चुकी हैं। हर बार कमाल कर दिखाया। बहुत से मुकाबले अपने और अपनी टीम के नाम किये। रेल मंत्रालय ने भी उसे विशेष टवीट करके बधाई दी है। 

Saturday, October 6, 2012

हॉकी और क्रिकेट लीग की शुरूआत

05-अक्टूबर-2012 18:59 IST
दोनों लीग जनवरी-फरवरी, 2013 में खेली जाएंगी
एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (एआईयू) देश भर के विश्‍वविद्यालयों में खेलों को बढ़ावा देने के लिए रोहिन्‍टन बारिया क्रिकेट ट्रॉफी, अंतर विश्‍वविद्यालय हॉकी टूर्नामेंट और अन्‍य कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है। विश्‍वविद्यालय के प्रतिभावान खिलाड़ी को प्रोत्‍साहित करने और विश्‍वविद्यालयों में खेलों को बढ़ावा देने के लिए राष्‍ट्रीय स्‍तर पर क्रिकेट और हॉकी टूर्नामेंट आयोजित करने का विचार बनाया गया। 

यूनिवर्सिटीज क्रिकेट लीग जोनल स्‍तर पर होने वाली प्रतिस्‍पर्धाओं के जरिए क्‍वालीफाइ करने वालों में से टी-20 की तर्ज पर आठ शीर्ष विश्‍वविद्यालयों के बीच खेली जाएगी। इसी तरह यूनिवर्सिटीज हॉकी लीग शीर्ष आठ टीमों के बीच खेली जाएगीं जिनका चयन जोनल प्रतिस्‍पर्धाओं के जरिए होगा। दोनों लीग जनवरी-फरवरी, 2013 में खेली जाएंगी। 

आयोजन समिति, एआईयू, एनडीटीवी के बीच इनके आयोजन के लिए कल शाम एक समझौता हुआ। 

मीणा/कविता/यशोदा- 4817