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Friday, February 2, 2024

पहले ओलंपियन सुखबीर सिंह गिल की स्मृति में प्रेस निमंत्रण

हॉकी स्टेडियम में एक स्मृति हॉकी मैच 3 फरवरी को 


चंडीगढ़
: 2 फरवरी 2024: (कार्तिका कल्याणी सिंह//खेल स्क्रीन ब्यूरो)::

हम पहले ओलंपियन सुखबीर सिंह गिल की स्मृति में तीन फरवरी को एकत्रित हो रहे हैं। गौरतलब है कि उनका  ब्रायन कैंसर के कारण 47 साल की उम्र में निधन हो गया था। उनके श्रद्धांजलि समारोह और भोग समारोह में भाग लेने के लिए चंडीगढ़ के सभी मीडिया कर्मियों और संस्थानों को इसमें भाग लेने और कवरेज करने की गुजारिश है। इसके साथ ही नागरिकों से भी हम अनुरोध करते हैं कि वे भी इसमें बढ़ चढ़ कर भाग लें। 

चंडीगढ़ के सेक्टर 42 स्थित हॉकी स्टेडियम में सुबह 11:00 बजे दिनांक 03 फरवरी को उनकी स्मृति में एक हॉकी मैच का आयोजन होगा। हॉकी स्टेडियम 42 से गुरुद्वारा साहिब सेक्टर 49 तक श्रद्धांजलि मार्च भी निकलेगा जिसका रुट मार्गसेक्टर- 42-43-44-45-46-49 की आंतरिक सड़कों से होगा।  इसके बाद भोग और अंतिम ार्ड्स का आयोजन सेकतर 49 गुरुद्वारा के गुरुद्वारा साहिब में होगा। 

ब्रेन टयूमर के साथ संग्राम को लेकर उनका जीवन लगातार संघर्ष का जीवन बना रहा। सुखबीर सिंह गिल को दिसंबर 2006 में ब्रेन टयूमर की इस भयानक बीमारी का पता चल गया था। उन्हें कुछ समय से सांस लेने में भी दिक्कत हो रही थी। इससे पहले के खतरे को रोका जा सकता एक दिन अचानक उन्हें दौरा पड़ा और वह घर पर ही गिर पड़े। यह इस खतरे की गंभीर शिखर थी। परिजनों की तरफ से उन्हें उन्हें एक निजी क्लिनिक में ले जाया गया जहां सीटी स्कैन और एमआरआई परीक्षण की एक आवश्यक शृंखला के माध्यम से उन्हें ब्रेन ट्यूमर होने का पता चला। 

ब्रेन ट्यूमर का यह मामला बेहद गंभीर निकला। इसे ठीक करने के लिए कई बार ब्रेन की सर्जरी करवाई गई थीं लेकिन यह बीमारी बार बार सिर उठाने लगी। इसका स्थाई इलाज नहीं हो पाया। पहली सर्जरी उत्तर भारत के जानेमाने सर्वश्रेष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ. वीके काक ने की थी। उम्मीद थी ान उन्हें इससे पक्की राहत मिल सकेगी लेकिनट्यूमर का फिर से उभरना जारी रहा। 

इस के चलते ही ओपन स्कल ऑपरेशन और गामा नाइफ रेडियो सर्जरी सहित विभिन्न जटिल चिकित्सा प्रक्रियाओं की आवश्यकता भी पड़ी। बीच में जब वह आंशिक रूप से ठीक हो गए तो वह स्कल कैप के साथ खेल के मैदान में लौटे और प्रीमियर हॉकी लीग में खेले। 

इसी तरह सं 2021 में आखिरी चिकित्सा प्रक्रिया ने उन्हें पूरी तरह से बिस्तर पकड़ने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने घरेलू हॉकी में भारत पेट्रोलियम का प्रतिनिधित्व किया और इसी में नौकरी की। भारत पेट्रोलियम ने ही गिल को सभी चिकित्सा सहायता प्रदान की और प्रमुख और महंगी सर्जरी और चिकित्सा प्रक्रियाओं के लिए अधिकांश चिकित्सा बिल उठाए। इस तरह उन्हें बचाने की निरंतर कोशिशें की गईं। उन्हें बचाने के सभी प्रयास नाकाम रहे। 47/48 वर्ष की उम्र में वह उस सफर पर रुखसत हो गए जहां से कोई नहीं लौटता। अब उनकी यादें शेष हैं। जिन जिन स्थानों से उनका लगवा और अनजाना रहा वहां के  अब भी महसूस होते हैं। 

उल्लेखनीय है कि चंडीगढ़ से ही शुरू हुआ था श्री गिल का हॉकी के साथ ऐतिहासिक इश्क़ का सफर। यहाँ की सडकें,यहाँ के इलाके, यहाँ के लोग उनके साथ भावनात्मक तौर पर भी जुड़े हुए थे। इसी हवा में  ली थी। यह अखिरो सांसों तक जारी भी रहा। सुखबीर गिल के हॉकी के खेल के शुरुआती दिनों में सेक्टर-41 में शिवालिक पब्लिक स्कूल में अपने हाॅकी के खेल को निखारा और बाद में सेक्टर-10 में डीएवी कॉलेज चले गए। उन्होंने भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की करने से पहले अखिल भारतीय अंतर-विश्वविद्यालय हॉकी चैंपियनशिप में पंजाब यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व किया। संन्यास लेने के बाद गिल ने मोहाली के शिवालिक पब्लिक स्कूल में एक अकादमी चलाई और उभरते और पेशेवर खिलाड़ियों को मंच प्रदान करने के लिए हर साल हॉकी चैंपियनशिप का आयोजन किया। 

उनकी सांसें रुक गई। उम्र की पूँजी भी खत्म हो गई लेकिन उनसे जुड़ें बातें अब भी हमारे ज़हन में हैं। उनकी प्रेरणा लगातार चलती रहेगी।  महफिलों में उनकी चर्चा बानी रहेगी। भारत पेट्रोलियम का प्रतिनिधित्व करने के अलावा चंडीगढ़ टीम के नियमित सदस्य रहे। वह सिडनी ओलंपिक (2000), कुआलालंपुर में हॉकी विश्व कप (2002) और 2002 में कोलोन (जर्मनी) में एफआईएच चैंपियंस ट्रॉफी में भारतीय टीम की ओर से खेले।उनका खेल नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत बना रहेगा। 

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