Monday, April 22, 2013

जिंदगी में संतुलन का खेल सिखाते हैं बंटी बाबा

उहदा रब्ब नहीं रुस्दा लख्ख वेरी---जिह्नुं यार मनाउन दा चज्ज होवे---
दो बरस पहले न्यू अग्रवाल पीरखाना दरबार में बायीं तरफ की दीवार पर दो पंक्तियाँ लिखीं होतीं थीं---
भला एथे फकीरां नू फ़िक्र काहदा--
फक्का मार के फिकरां नू  खा जांदे 
अब दो बरस बाद वहां आई संगत को देख कर यही लगता था कि सचमुच इन सभी लोगों के गम, दर्द, दुःख, चिंता, फ़िक्र जैसे किसी ने पल भर में उड़ा दिए हों--मैंने कुछ लोगों को जानबूझ कर कुरेदा क्या सचमुच तुम्हे कोई गम नहीं---कोई चिंता नहीं----सभी मुस्कराते हुए कहते----
भला एथे फकीरां नू फ़िक्र काहदा--
फक्का मार के फिकरां नू  खा जांदे----
मुझे लगता यह सब लोग किसी खुमारी में हैं---किसी नशे में हैं----इसी लिए काम धंधा और घरबार छोड़ कर यहाँ घूम रहे हैं---पर यहाँ कोई नशा नहीं था---सब लोग एक खेल खेलने आये थे---जिंदगी का खेल---मुश्किलों से हंसते हंसते दो दो हाथ करने का खेल----अगर बाहर बने खुले मैदान में बच्चा लोग झूला झूल रहे थे---कभी ऊपर कभी नीचे---तो--बड़े लोगों में भी यही खेल चल रहा था---लेकिन मन के अंदर---दिल के अंदर---दिमाग के अंदर----ख्यालों की दुनिया में----कभी ख़ुशी कभी गम---कभी सफलता की ऊँचाई---और बन्दा आसमान पर----कभी निराशा का अँधेरा और बन्दा गम और दुःख के पाताल में---इस सारे खेल को बड़ी कुशलता से देख रहे----यहाँ इस दरबार के प्रमुख सेवादार बंटी बाबा कभी किसी को बुला लेते और कभी किसी को---कहते क्या सोच रहा है----किस चिंता में है….? सब ठीक हो जायेगा---और उस भक्त को जैसे एक नया हौंसला मिल जाता---एक नई  हिम्मत---और भक्ति रस में डूब कर वह फिर तारो ताज़ा हो जाता----किस्सी के मन में कुछ आशंका होती या फिर उसे लगता की इतना बड़ा दुःख पल भर सचमुच दूर हो जायेगा---? इधर भक्त के मन में यह सवाल आता उधर बंटी बाबा बोल उठते---जा उधर पीर बाबा से जो मांगना है मांग ले----यहाँ तेज़ तरार लोग भी आते…मन में शैतानी छुपी होती---चेहरे पे भोलापन लिए होते---सजदा करते----नाक रगड़ते---फिर धीरे से कहते बंटी बाबा हमारा काम क्यूं बिगड़ा हुआ है---कुछ करो न----झुके हुए श्रद्धालू को देखते ही बाबा पल भर के लिए आँख बंद  करते और कहते--शराब पीना छोड़ दे----पर नारी की तरफ देखना छोड़ दे--सब ठीक हो जायेगा----जो भक्त कहता बाबा लो आज से सचमुच सब  बुरे काम छोड़े----बाबा उनकी पीठ भी थपथपाते …शाबाशी भी देते---लेकिन साथ ही कहते---वादा मेरे सामने नहीं---वहां ---उधर पीरों की तरफ मूंह करके करो--साथ ही चेतावनी भी देते---अगर वादा टूटा तो तुझे पीर बाबा ही देखेंगे----मानो बाबा एक झूले पे बिठा देते…जिंदगी के संतुलन का एक झूला--जिसपे हम सभी सवार हैं--लेकिन फिर भी उसे देख नहीं पाते----थोड़ी सी ख़ुशी मिली तो भी सब भूल जाते हैं---थोडा सा गम मिला तो भी दर्द से कराहने लगते हैं---बस यहाँ आने वाले को बंटी बाबा सुख दुःख--दोनों में मज़ा लेने का गुर सिख देते---और अगर कोई वादा टूटता तो वादा तोड़ने वाला किसी न किसी बहाने झूले से नीचे आ गिरता---संतुलन से बाहर आ गिरता---फिर सुख भी मज़ा न देता---और दुःख भी असहनीय हो जाता---भगवान से तार टूट जाती---जिंदगी का संतुलन बिगड़ जाता--और फिर दर्द ही दर्द---जख्म ही जख्म---बंटी बाबा वादा तोड़ कर गिरने वाले को भी आ कर उठाते----उसके घाव सहलाते---गले से लगाते----और प्यार से डांटते---तुझे कहा था न वादा मत तोड़ना--जा अब पीर बाबा को मना---रो मत---चिंता न कर---फिर से सब ठीक हो जायेगा---और पीर बाबा को मनाने के स्वर गूँज उठते----हमसर हयात निजामी जैसे जाने माने गायक यहाँ इस दरबार में आ कर गाते----काअबे वाली गली विच्च यार दा मकान ए-------और बंटी बाबा जिंदगी में संतुलन लाने का गुर बता देते कि कैसे काअबे का सम्मान भी रखना है----और बिना अपने अल्ला को नाराज़ किये यार को भी नाराज़ नहीं होने देना---बाबा बताते हैं-----यार का घर कहीं भी हो----पर यह याद रखना जरूरी है कि--
उहदा रब्ब नहीं रुस्दा लख्ख वेरी---जिह्नुं यार मनाउन दा चज्ज होवे--- --आर के तारेश

Wednesday, April 17, 2013

मुक्‍केबाज विजेन्‍द्र सिंह आशंकाओं के बादलों से दूर हुए

16-अप्रैल-2013 18:27 IST
प्रतिब‍न्धित दवाओं के सेवन के आरोप से मुक्‍त
ओलम्‍पिक पद्क विजेता मुक्‍केबाज विजेन्‍द्र सिंह और चार अन्‍य प्रतिब‍न्धित दवाओं के सेवन के आरोप से मुक्‍त हो गए हैं। उनके केवल रक्‍त और मूत्र का परीक्षण किया गया था। युवा मामले और खेल मंत्रालय ने सहर्ष यह घो‍षणा करते हुए कहा है कि परीक्षणों से स्‍पष्‍ट हो गया है कि इनमें से किसी भी मुक्‍केबाज ने हाल ही में प्रतिबन्धित दवाओं का सेवन नहीं किया था। 
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वि.कासोटिया/नरेश/संजना-1876

Monday, March 25, 2013

शरापोवा क्वार्टर फाइनल में

शरापोवा का मुकाबला चेक गणतंत्र की क्लारा ज़ाकोपालोवा से
                                                                                            फ़ोटो: EPA   
रूसी टेनिस खिलाड़िन मरिया शरापोवा अमरीका के मायामी नगर में हो रहे टेनिस टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल में पहुँच गई हैं| रविवार को उन्होंने अपनी देशवासिन येलेना वासिना को 6:4, 6:2 से हराया| अगले राउंड में शरापोवा का मुकाबला चेक गणतंत्र की क्लारा ज़ाकोपालोवा से होगा| 
इस टूर्नामेंट की पुरस्कार राशि 50 लाख डालर है| 17 मार्च को शरापोवा ने अमरीका में ही इन्डियन-वैल्स में हुई प्रतियोगिता में जीत पाई थी, जिसकी बदौलत उन्हें महिला टेनिस एसोसिएशन की रेटिंग-सूची में दूसरा स्थान मिल गया है|

शरापोवा क्वार्टर फाइनल में

Thursday, January 24, 2013

राष्‍ट्रीय खेल संघ:पूरी जानकारी को कहा

24-जनवरी-2013 20:04 IST
राष्‍ट्रीय खेल संघों से मान्‍यता प्राप्त राज्‍य संघों के ब्‍यौरे के संबंध में 
केन्‍द्रीय युवा एवं खेल मंत्रालय ने राज्‍य सरकारों से राष्‍ट्रीय खेल संघों से मान्‍यता प्राप्‍त राज्‍य खेल संघों/इकाईयों की सूची उपलब्‍ध कराने का आग्रह किया है। राज्‍य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों के खेल सचिवों को लिखे पत्र में मंत्रालय ने मान्‍यता प्राप्‍त राज्‍य खेल संघों/इकाईयों के पदाधि‍करियों के नाम, उनके पते, टेलिफोन नंबर और ई-मेल पते इत्‍यादि के बारे में पूरी जानकारी मुहैय्या कराने को कहा है। पत्र के जरिए राज्‍य सरकारों से राज्‍य/केंद्र शासित प्रदेश ओलंपिक संघों के बारे में भी इसी तरह का पूरा ब्‍यौरा देने का आग्रह किया गया है। 

पत्र में कहा गया है कि केंद्रीय युवा और खेल मंत्रालय उन मान्‍यता प्राप्‍त राष्‍ट्रीय खेल संघों से ही मिलकर काम करता है जो कामकाज में स्‍वायत्‍त और देश में संबंधित खेलों के विकास के लिए जिम्‍मेदार होता है। मंत्रालय “राष्‍ट्रीय खेल संघों को मदद” योजना के तहत भारत में राष्‍ट्रीय/अंतर्राष्‍ट्रीय टूर्नामेंट कराने, विदेशों में प्रशि‍क्षण/प्रतियोगिता में भागीदारी, विदेशी कोचों की सेवाएं लेना, खेल के संसाधन जुटाने इत्‍यादि के लिए वित्‍तीय मदद भी मुहैया कराता है। मंत्रालय ने 53 राष्‍ट्रीय खेल संघों को मान्‍यता दी हुई है। 

पत्र में कहा गया है कि राष्‍ट्रीय खेल संघ प्रदेशों में खेल को बढावा देने के उद्देश्‍य से प्रदेश में टूर्नामेंट के आयोजन और ऐसी अन्‍य गतिविधि‍यों में राज्‍य संघों/इकाईयों की मदद लेता है। केंद्रीय मंत्रालय ने राज्‍य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों से ये ब्‍यौरे प्राथमिकता के आधार पर 5 फरवरी 2013 तक उपलब्‍ध कराने को कहा है। (PIB)
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वि.कासोटिया/अनिल/अखलद-317

Saturday, October 6, 2012

हॉकी और क्रिकेट लीग की शुरूआत

05-अक्टूबर-2012 18:59 IST
दोनों लीग जनवरी-फरवरी, 2013 में खेली जाएंगी
एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (एआईयू) देश भर के विश्‍वविद्यालयों में खेलों को बढ़ावा देने के लिए रोहिन्‍टन बारिया क्रिकेट ट्रॉफी, अंतर विश्‍वविद्यालय हॉकी टूर्नामेंट और अन्‍य कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है। विश्‍वविद्यालय के प्रतिभावान खिलाड़ी को प्रोत्‍साहित करने और विश्‍वविद्यालयों में खेलों को बढ़ावा देने के लिए राष्‍ट्रीय स्‍तर पर क्रिकेट और हॉकी टूर्नामेंट आयोजित करने का विचार बनाया गया। 

यूनिवर्सिटीज क्रिकेट लीग जोनल स्‍तर पर होने वाली प्रतिस्‍पर्धाओं के जरिए क्‍वालीफाइ करने वालों में से टी-20 की तर्ज पर आठ शीर्ष विश्‍वविद्यालयों के बीच खेली जाएगी। इसी तरह यूनिवर्सिटीज हॉकी लीग शीर्ष आठ टीमों के बीच खेली जाएगीं जिनका चयन जोनल प्रतिस्‍पर्धाओं के जरिए होगा। दोनों लीग जनवरी-फरवरी, 2013 में खेली जाएंगी। 

आयोजन समिति, एआईयू, एनडीटीवी के बीच इनके आयोजन के लिए कल शाम एक समझौता हुआ। 

मीणा/कविता/यशोदा- 4817