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Monday, September 20, 2021

खेलों को बढ़ावा देने के लिए रोडमैप तैयार करने के प्रक्रिया में तेज़ी

 प्रविष्टि तिथि: 20 SEP 2021 6:13 PM by PIB Delhi

श्री अनुराग ठाकुर ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के खेल मंत्रियों के साथ बातचीत की

अंतरराष्ट्रीय विविध-खेल प्रतिस्पर्धाओं और ज़मीनी स्तर पर होगा सुधार

भारत में खेल अवसंरचना के लिए एकीकृत डैशबोर्ड बनाया जाएगा: श्री अनुराग ठाकुर


नई दिल्ली
: 20 सितंबर 2021: (पीआईबी//खेल स्क्रीन)::

खेलों को बढ़ावा देने के लिए रोडमैप तैयार करने के प्रक्रिया में तेज़ी आ रही है और इस मकसद के लिए खेल मंत्री अनुराग ठाकुर सक्रिय हैं। वह तेज़ी से इस तरह सारी प्रक्रिया चला रहे हैं। इसकी मुख्य बातों में बहुत सी काम की बातें शामिल हैं। निश्चय ही इससे निकट भविष्य में सुधर नज़र आने लगेगा। 

मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से एथलीटों के लिए नकद पुरस्कारों का एक साझा कोष बनाने पर अपना फीडबैक भेजने का अनुरोध किया। इस कोष में केंद्र और राज्य सरकार दोनों को धन जमा करने की सुविधा होनी चाहिए, ताकि सभी राज्यों के खिलाड़ियों को पदक जीतने के बाद समान लाभ मिल सके।


डैशबोर्ड पर प्रत्येक राज्य,
जिला और प्रखंड में खेल-अवसंरचना से जुड़े आंकड़े उपलब्ध रहेंगे।

भविष्य की खेल प्रतिस्पर्धाओं के लिए हमारे एथलीटों को तैयार करने के क्रम में सभी राज्य, राष्ट्रीय खेल संघों, शैक्षणिक संस्थानों, केंद्र सरकार और अन्य हितधारकों के साथ जुड़ेंगे-केंद्रीय खेल मंत्री ने यह भी कहा। 

केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने आज देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खेल मंत्रियों के साथ वर्चुअल माध्यम के जरिये बातचीत की। टोक्यो में ओलंपिक और पैरालंपिक की बड़ी सफलता के बाद, आज की बैठक भविष्य के ओलंपिक, एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों को ध्यान में रखते हुए हमारे एथलीटों को तैयार करने के लिए रोडमैप तैयार करने और जमीनी स्तर पर खेलों को बढ़ावा देने में राज्यों के योगदान पर विचार करने के लिए आयोजित की गयी थी। वर्चुअल बैठक के दौरान खेल विभाग के सचिव श्री रवि मित्तल भी मौजूद थे।              


इस चर्चा के दौरान,
केन्द्रीय मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने राज्यों और केन्द्र - शासित प्रदेशों से एथलीटों के लिए नकद पुरस्कारों का एक ऐसा साझा पूल बनाने के बारे में अपनी राय भेजने के लिए कहा जहां केन्द्र और राज्य सरकारें दोनों मिलकर धन जमा कर सकें ताकि सभी राज्यों के खिलाड़ियों को पदक जीतने पर समान रूप से लाभ मिल सके। खेल, राज्य का एक विषय है और इस बातचीत का समग्र उद्देश्य राज्यों से शारीरिक रूप से सक्षम और पैरा-एथलीटों के लिए ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन के साथ-साथ जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आग्रह करना था। स्कूल स्तर के खेलों को बढ़ावा देना और स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजीएफआई) को सहयोग देना इस चर्चा का एक अन्य प्रमुख बिंदु था।

श्री अनुराग ठाकुर ने इस बैठक के बाद कहा कि आज की बैठक बेहद उपयोगी रही और हम प्रगति का मूल्यांकन करने और साथ मिलकर बेहतर बुनियादी ढांचे और अधिक संख्या में प्रशिक्षकों, ट्रेनरों एवं फिजियोथेरेपिस्टों का प्रबंध करने के तरीकों के बारे में चर्चा करने के लिए साल में कम से कम दो बार मिलने पर सहमत हुए हैं। श्री ठाकुर ने कहा कि हम विभिन्न अंचलों (जोन) में क्षेत्रीय बैठकें करेंगे। इसके अलावा, हम एक ऐसा डैशबोर्ड बनाने पर भी विचार कर रहे हैं जहां हर राज्य, जिला और प्रखंड में उपलब्ध खेल के बुनियादी ढांचे से संबंधित डेटा उपलब्ध होगा। यह डैशबोर्ड कितने कोच उपलब्ध हैं, उन इनडोर स्टेडियमों में किस तरह के खेल खेले जाएंगे या आउटडोर खेलों आदि के बारे में सभी प्रासंगिक जानकारियां देगा और ये सभी विवरण एक बटन दबाने पर उपलब्ध होंगे।

श्री ठाकुर ने यह भी कहा कि विभिन्न खेलों के लिए प्रतिभा खोज कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, जिससे देश में कम उम्र में ही प्रतिभाओं की पहचान की जा सके और उन्हें भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए अच्छी तरह प्रशिक्षित कर सकें। श्री ठाकुर ने कहा कि हमने राज्यों से अनुरोध किया है कि खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धा के अधिक से अधिक अवसर देने के लिए और प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएं और उन्हें राज्य स्तर, जिला स्तर तथा राष्ट्रीय स्तर पर अधिक स्पर्धाओं में भाग लेने का मौका मिले।

श्री ठाकुर ने प्रधानमंत्री का उल्लेख करते हुए कहा कि जैसा कि प्रधानमंत्री सहकारी संघवाद के बारे में कहते हैं, सभी राज्य राष्ट्रीय खेल संघों, शैक्षणिक संस्थानों, केंद्र सरकार के साथ-साथ अन्य हितधारकों के साथ मिलकर काम करेंगे ताकि हमारे खिलाड़ियों को भविष्य की प्रतिस्पर्धाओं के लिए तैयार करने तथा भविष्य में और पदक जीतने के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा प्रदान करने में मदद मिले।

इस समय देश में 23 राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों में 24 केआईएससीई हैं, जबकि देश के विभिन्न जिलों में 360 केआईसी खोले गए हैं। श्री ठाकुर ने राज्यों से अनुरोध किया कि वे भारत के भावी चैंपियनों को सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षण, बुनियादी ढांचा, चिकित्सा सुविधाओं सहित सभी महत्वपूर्ण सुविधाएं प्रदान करने में अपनी पूरी क्षमता से योगदान दें।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय खेल दिवस 2019 पर शुरू किया गया फिट इंडिया मूवमेंट फिट सहित इंडिया फ्रीडम रन, फिट इंडिया मोबाइल ऐप, फिट इंडिया क्विज आदि जैसे विभिन्न अभियानों के माध्यम से फिटनेस की आदत को विकसित करने के लिहाज से एक गेम चेंजर रहा है। श्री ठाकुर ने राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों के खेल मंत्रियों से उपरोक्त अभियानों में भाग लेने और उन्हें बढ़ावा देने का अनुरोध किया। उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों से देश में खेलों के अनुकूल प्रवेश को मजबूत करने के उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए केआईएससीई, केआईसी के साथ-साथ अकादमियां खोलने के प्रस्ताव भेजने का भी आग्रह किया।

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एमजी/एएम/जेके/आर/पीके/डीवी

Friday, June 18, 2021

खेल पुरस्कार 2021 के लिए आवेदन की तारीख बढ़ाई

 18-जून-2021 17:05 IST

खेल मंत्रालय ने कहा अब अंतिम तिथि 28 जून तक होगी 

नई दिल्ली: 18 जून 2021: (पीआईबी//खेल स्क्रीन)::

खेलों के क्षेत्र में बहुत से युवा बहुत ही अच्छा कार्य कर रहे हैं। यदि उन्हें उत्साह मिले तो वे और भी अच्छा काम करेंगे। इसी भावना को सामने रखते हुए खेलों के क्षेत्र में पुरस्कार का आवेदन करने की तारीख बढ़ा दी गई है। अब यह तारीख 28 जून होगी।  

इस संबंध में जारी विज्ञप्ति के मुताबिक युवा मामले और खेल मंत्रालय ने 2021 के लिए राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार, अर्जुन पुरस्कार, द्रोणाचार्य पुरस्कार, ध्यानचंद पुरस्कार, राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन  पुरस्कर (आरकेपीपी) और मौलाना अबुल कलाम आजाद ट्रॉफी(एमएकेए) जैसे खेल पुरस्कारों के लिए नामांकन/आवेदन 19 और 20 मई को आमंत्रित किए थे। अधिसूचनाएं मंत्रालय की वेबसाइट www.yas.nic.in.पर अपलोड की गई थीं।

नामांकन प्राप्त करने की अंतिम तिथि 21 जून, 2021 से बढ़ाकर 28 जून, 2021 (सोमवार) कर दी गई है। पुरस्कार के लिए पात्र खिलाड़ियों/ कोचों/ संस्थाओं/ विश्वविद्यालयों से नामांकन/आवेदन आमंत्रित किएजाते हैं और उन्हें surendra.yadav@nic.in या girnish.kumar@nic.in पर ई-मेल किया जाना है। भारतीय ओलंपिक संघों/भारतीय खेल प्राधिकरण/मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय खेल संघों/खेल संवर्धन बोर्डों/राज्य और केंद्र सरकारों आदि को भी तदनुसार सूचित किया जाता है । 28 जून, 2021 के बाद प्राप्त नामांकन पर विचार नहीं किया जाएगा।


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Friday, September 11, 2020

उपराष्ट्रपति ने देश में खेल संस्कृति को पुनर्जीवित करने का आह्वान किया

11-सितम्बर-2020 13:59 IST
छात्रों को कक्षाओं के बाद  शेष आधा वक़्त मैदान में बिताना चाहिए 
फिट रहने के कई तरीके सदियों से लोकप्रिय हैं-YAS Ministry फोटो 

*असाधारण खिलाड़ी उत्कृष्ट नेता भी बन सकते हैं: उपराष्ट्रपति 
*युवा खेल प्रतिभाओं की पहचान करने के लिए प्रभावी प्रतिभा निगरानी प्रणाली का आह्वान
*देश में विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में खेल के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने की आवश्यकता है 
*अधिक कुशल भारतीय कोचों के बड़े पूल का निर्माण करने पर भी ज़ोर दिया
*खेल प्रबंधन में पाठ्यक्रम की पेशकश करने के लिए अधिक शैक्षणिक संस्थानों से आग्रह 
*देश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है
*हमें मजबूत सपोर्ट सिस्टम की जरूरत है
*पंजाब विश्वविद्यालय को वर्ष 2020 के लिए मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ट्रॉफी जीतने पर बधाई दी
उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने भारत में खेल संस्कृति को पुनर्जीवित करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि लोगों को तनाव मुक्त जीवन और अच्छे स्वास्थ्य के लिए खेल, योग या फिर किसी अन्य शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या का अभिन्न अंग बनाना चाहिए।
गांव के लोग आज भी किसी आधुनिक  मोहताज नहीं--YAS Ministry फोटो 

श्री नायडू पंजाब विश्वविद्यालय को वर्ष 2020 के लिए लगातार दूसरी बार खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए प्रतिष्ठित मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ट्रॉफी जीतने पर बधाई भाषण दे रहे थे। उन्होंने स्कूलों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों को सक्रिय रूप से खेलों को और अधिक बढ़ावा देने पर ज़ोर दिया।
श्री नायडू ने पंजाब विश्वविद्यालय के अधिकारियों को इस ट्रॉफी के लिए संक्षिप्त नाम के उपयोग नहीं करने की हिदायत दी, बल्कि उन्हें हमेशा इसे मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ट्रॉफी के रूप में उल्लेख करने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि छात्रों को अपना आधा समय कक्षाओं में और शेष आधा वक़्त मैदान में बिताना चाहिए। श्री नायडू ने कहा कि मैदान से उनका तात्पर्य खेल मैदान, कृषि क्षेत्र और सामाजिक क्षेत्र से है।
यह देखते हुए कि खेलों में उत्कृष्टता अथक परिश्रम, योजना और दृढ़ संकल्प से आएगी, उपराष्ट्रपति ने शैक्षणिक प्रतिभा के साथ-साथ खेल उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए पंजाब विश्वविद्यालय के प्रशिक्षकों, प्रबंधन, कर्मचारियों और छात्रों की काफी सराहना की।
देश में, खासकर युवाओं में जीवनशैली से सम्बंधित बीमारियों की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमारे युवाओं को अस्वास्थ्यकर आहार और आरामतलब जीवनशैली के खतरों से अवगत कराना सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।
श्री नायडू ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किए गए "फिट इंडिया अभियान" की सराहना की और कहा कि यह निश्चित रूप से लोगों को फिट और स्वस्थ रहने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
ग्रामीण स्कूलों के बच्चे भी भी इसी तरह बढ़े होते हैं--YAS Ministry फोटो 
श्री नायडू ने कहा कि खेल और खेल संबंधी अन्य गतिविधियां हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और ये हमारी शारीरिक फिटनेस में सुधार करती हैं। उन्होंने कहा कि खेल हमारी संज्ञानात्मक क्षमताओं में सुधार करता है और समूहिक खेल हमारे सामाजिक कौशल को बढ़ाते हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि खेल एकरूपता का दृष्टिकोण विकसित करने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि यह संतुलन बिना किसी कटुता, कुंठित इच्छा या कुत्सित भावना के असफलताओं और बाधाओं को स्वीकार करने के लिए आवश्यक है।
श्री नायडू ने कम उम्र से ही खेल प्रतिभाओं की पहचान करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। साथ ही उन्होंने इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए एक प्रभावी और व्यापक प्रतिभा निगरानी और स्काउटिंग प्रणाली की व्यवस्था का आह्वान किया।
देश में विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, खेल के बुनियादी ढांचे को बेहतर करने की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए, श्री नायडू ने देश में ही प्रशिक्षित उच्च कुशल भारतीय कोचों का पूल बनाने आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कोच काफी महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी निभाते हैं।
उपराष्ट्रपति ने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से खेल प्रबंधन में अधिक संख्या में डिग्री और डिप्लोमा प्रदान करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों का प्रदर्शन अधिक बेहतर करने के लिए कुशल खेल चिकित्सा विशेषज्ञों और पेशेवरों का एक संगठन बनाना चाहिए।
श्री नायडू ने उन क्षेत्रों में अधिक संसाधनों के निवेश के महत्व को रेखांकित किया जिनमें भारत को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ है। खिलाड़ियों को राष्ट्रीय गौरव के रूप में करार देते हुए, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि परिश्रम के साथ, भारत अंतर्राष्ट्रीय खेल आयोजनों में कई और पुरस्कार जीतकर आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि हमारे देश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है और इसके लिए हमें मजबूत समर्थन प्रणाली की जरूरत है।
इस अवसर पर पंजाब विश्वविद्यालय के कुलपति श्री राज कुमार और खेल निदेशक, कोच तथा पुरस्कार विजेता उपस्थित थे।
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Wednesday, August 5, 2020

प्रतिभाओं की पहचान के लिए वार्षिक खेलो इंडिया की मेजबानी करें

प्रविष्टि तिथि: 04 AUG 2020 8:34PM by PIB Delhi
 खेल मंत्री का राज्यों से अनुरोध कि वे जमीनी स्तर का काम तेज़ करें 
नई दिल्ली: 4 अगस्त 2020: (PIB//खेल स्क्रीन)::
केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने आज खेलो इंडिया योजना की पहली आम सभा की बैठक की अध्यक्षता की और राज्य के खेल विभागों और अन्य केंद्रीय मंत्रालयों के अधिकारियों को संबोधित किया। बैठक के दौरान बोलते हुए उन्होंने राज्यों से अनुरोध किया कि वे राज्य स्तरीय खेलो इंडिया गेम्स के वार्षिक आयोजन की मेजबानी करें ताकि बड़े पैमाने पर जमीनी स्तर की प्रतिभाओं की पहचान की जा सके। बैठक में खेल सचिव श्री रवि मित्तल; भारतीय खेल प्राधिकरण के महानिदेशक श्री संदीप प्रधान और खेल मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
      श्री किरेन रिजिजू ने कहा,“खेलो इंडिया योजना के तहत राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली वार्षिक प्रतियोगिताओं, जैसे कि खेलो इंडिया यूथ गेम्स और यूनिवर्सिटी गेम्स, ने सभी राज्यों से खेल प्रतिभाओं को पहचानने में मदद की है।हालांकि, यह पर्याप्त नहीं है। हर राज्य जमीनी स्तर की प्रतिभा की पहचान करने और राज्य से खेल प्रतिभाओं को एक बड़ा मंच देने के लिए वार्षिक खेलो इंडिया गेम्स का आयोजन कर सकता है। राज्य जो पहले से ही वार्षिक खेल प्रतियोगिताओं का संचालन करते हैं, वे खेलो इंडिया स्कीम के साथ जुड़ सकते हैं और केंद्र इन आयोजनों को संचालित करने में उनका समर्थन करेगा।”
      जमीनी स्तर की प्रतिभाओं की पहचान के महत्व को बताते हुए खेल मंत्री ने कहा,“भारत को एक खेल महाशक्ति बनाने के लिए हमें 5-10 वर्ष आयु वर्ग की प्रतिभाओं को पहचानना होगा और उन्हें भविष्य में चैंपियन बनने में मदद करनी होगी।ओलंपिक के लिए एक एथलीट को तैयार करने में कम से कम 8 साल लगते हैं, और यदि हम बाद के स्तर पर प्रतिभा की पहचान करते हैं, तो ओलंपिक पोडियम पर इसे बनाने की उनकी संभावना सीमित है। इसलिए, राज्यों को युवा प्रतिभा की पहचान करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और राज्य, जिला, ब्लॉक और पंचायत स्तर पर प्रतियोगिताओं का आयोजन करना महत्वपूर्ण है।”
      केंद्रीय खेल मंत्री ने पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण और उत्तर पूर्व भारत के लिए 5 क्षेत्रीय प्रतिभा स्काउटिंग समितियों की बात की और 24 खेल विषयों में जमीनी स्तर की प्रतिभा की पहचान करने में इन समितियों की सहायता करने में राज्यों की सक्रिय भागीदारी के लिए कहा। उन्होंने कहा,“फिर पहचानी गई प्रतिभाओं को राज्य सरकार या एसएआई केंद्रों में प्रशिक्षित किया जा सकता है। हमें प्रतिभाओं की पहचान करने में राज्य सरकारों से इनपुट की आवश्यकता है।”
      मंत्री ने राज्यों को प्राथमिकता के तौर पर खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (केआईएससीई) के लिए अपने सर्वश्रेष्ठ खेल बुनियादी ढांचे की पहचान करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा,“हम पहले ही 8 राज्यों की पहचान कर चुके हैं, जहां केआईएससीई की स्थापना की जाएगी। खेल मंत्रालय को भी 13 राज्यों से प्रस्ताव मिले हैं, जिन्हें अंतिम रूप दिया जा रहा है। केआईएससीई राज्यों के लिए देश भर के वरिष्ठ एथलीटों को चुनिंदा खेलों में प्रशिक्षण देने और उनमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए एक अत्याधुनिक बुनियादी ढांचा है। केंद्र इसमें राज्यों को निधि देने और समर्थन करने के लिए तैयार है, और इसलिए, मैं हर राज्य से आग्रह करता हूं कि वे अवसंरचना की तत्काल पहचान करें जिसे वे केआईएससीई के लिए चिन्हित करना चाहेंगे।”
      राज्य के प्रतिनिधियों ने खेल मंत्री द्वारा चर्चा की गई योजनाओं के क्रियान्वयन पर खेल मंत्रालय के साथ मिलकर काम करने में दिलचस्पी दिखाई। इनमें से कई ने पहले से मौजूद राज्य स्तरीय वार्षिक प्रतियोगिताओं और जमीनी स्तर की प्रतिभा पहचान योजनाओं का विवरण साझा किया।
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