Friday, December 20, 2024

युवाओं को सशक्त बनाया जाएगा

युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय//प्रविष्टि तिथि: 20 DEC 2024 at 8:23 PM by PIB Delhi//Azadi ka Amrit Mahotsav

खेलों को पुनर्जीवित करने का भी संकल्प

राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने प्रेस वार्ता में सरकार की पहलों पर प्रकाश डाला

नई दिल्ली: 20 दिसंबर 2024:(पीआईबी दिल्ली//खेल स्क्रीन)::

फाईल फोटो 
युवा कार्यक्रम और खेल मामलों की केंद्रीय राज्यमंत्री, श्रीमती रक्षा खडसे ने आज नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। उन्होंने युवाओं के लिए भारत सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न पहलों पर चर्चा की। साथ ही खेल क्षेत्र के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा भी की। प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

2014 के बाद से भारत ने युवा सशक्तिकरण में अभूतपूर्व प्रगति की है। रोजगार सृजन, MSME को समर्थन, स्टार्टअप्स को बढ़ावा, अर्थव्यवस्था का औपचारिकरण, अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहन, कौशल विकास, खेल उत्कृष्टता और फिटनेस को बढ़ावा जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। ये पहल "सबका साथ, सबका विकास" और "आत्मनिर्भर भारत" की दृष्टि के अनुरूप हैं, जो 2047 तक एक विकसित भारत की नींव रखती हैं।

मुख्य बिंदु:

युवा विकास प्राथमिकताएं:

केंद्रीय बजट 2024-25 में कौशल विकास, इंटर्नशिप और रोजगार सृजन के लिए ₹3,442.32 करोड़ का आवंटन किया गया, जो 2013-14 के ₹1,219 करोड़ से तीन गुना अधिक है।

राष्ट्रीय युवा नीति 2014 ने 2030 तक युवाओं की पूरी क्षमता का उपयोग सुनिश्चित करने के लिए एक सशक्त ढांचा प्रदान किया।

रोज़गार और कौशल विकास:

2023-24 में बेरोजगारी दर घटकर 3.2% हो गई।

PMKVY (प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना) और DDU-GKY (दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना) जैसी पहलों ने लाखों युवाओं को प्रशिक्षित किया और महत्वपूर्ण रोजगार परिणाम दिए ।

जुलाई 2024 में ईपीएफओ (EPFO) ने 19.94 लाख नए सदस्यों को जोड़ते हुए रिकॉर्ड वृद्धि हासिल की।

18-25 आयु वर्ग में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें जुलाई 2024 में 8.77 लाख नए सदस्य जुड़े। यह इस आयु वर्ग में अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि है और संगठित कार्यबल में युवाओं, विशेष रूप से पहली बार नौकरी करने वालों, के प्रवेश की प्रवृत्ति को दर्शाता है।

जुलाई 2024 में 3.05 लाख नई महिला सदस्य ईपीएफओ से जुड़ीं, जो साल-दर-साल 10.94% की वृद्धि को दर्शाती है।

राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में महाराष्ट्र ने कुल 20.21% नए सदस्यों के योगदान के साथ प्रथम स्थान हासिल करा ।

आर्थिक और स्टार्टअप विकास:

भारत अब 1.4 लाख मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स और 117 यूनिकॉर्न के साथ दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब है।

PMMY (प्रधानमंत्री मुद्रा योजना) और स्टैंड-अप इंडिया जैसी योजनाओं ने महिलाओं और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के उद्यमियों को सशक्त किया ।

खेल और फिटनेस:

2024 के एशियाई खेलों में 107 पदकों के साथ ऐतिहासिक प्रदर्शन।

खेलो इंडिया और TOPS कार्यक्रमों में बढ़े हुए निवेश ने ओलंपिक (6 पदक) और पैरालंपिक (29 पदक)  सफलता में योगदान दिया।

खेलो इंडिया बजट 596 करोड़ से बढ़ाकर 900 करोड़ किया गया ।

महिला सशक्तिकरण:

नारी शक्ति अधिनियम और सुकन्या समृद्धि योजना जैसी पहलों ने लैंगिक समानता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत किया ।

भारत की युवा-केंद्रित नीतियां और पहल एक मजबूत और समावेशी पारिस्थितिकी तंत्र को प्रोत्साहित करती हैं, जिससे हर युवा भारतीय राष्ट्र निर्माण में योगदान कर सके।

***//HP//(रिलीज़ आईडी: 2086643)

Thursday, November 28, 2024

एथलीटों को वित्तीय सहायता

प्रविष्टि तिथि: 28 NOV 2024 at 5:08 PM by PIB Delhi

कोर ग्रुप के एथलीटों को प्रति माह 50,000 रुपये की दर से (ओपीए) का भुगतान

नई दिल्ली: 28 नवंबर 2024: (पीआईबी दिल्ली//खेल स्क्रीन डेस्क)::

संकेतक तस्वीर Pexel से रवि रौशन 
भारत सरकार विभिन्न योजनाओं/कार्यक्रमों के माध्यम से विभिन्न प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्रदान करके एथलीटों को खेल को करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है:

1  खेलो इंडिया योजना के अंतर्गत  “खेलो इंडिया केंद्र और खेल अकादमियों” के लिए योजना में पहचानी गई प्रतिभाओं को मान्यता प्राप्त खेलो इंडिया अकादमियों में शामिल होने का विकल्प दिया जाता है। इसमें प्रशिक्षण व्यय, कोचिंग, प्रतियोगिताओं के प्रदर्शन, शिक्षा, उपकरण सहायता, वैज्ञानिक सहायता के लिए प्रति वर्ष 6लाख 28 हज़ार रूपये  [10,000/- रूपये प्रति माह आउट ऑफ़ पॉकेट अलाउंस (ओ पी ए)] सहित वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाती है। साथ ही खेलो इंडिया योजना के खेलो इंडिया केंद्र के अंतर्गत पूर्व चैंपियन एथलीटों को खेलो इंडिया केंद्रों (केआईसी) में युवा एथलीटों के लिए कोच/संरक्षक के रूप में नियुक्त किया जाता है। जो इन एथलीटों को प्रशिक्षित करते हैं और साथ ही केआईसी को स्वायत्त तरीके से या राज्य/संघ राज्य क्षेत्र के खेल विभाग के समर्थन से चलाते हैं।

2  टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स) के अंतर्गत सरकार भारत के शीर्ष एथलीटों को ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की तैयारियों के लिए सहायता प्रदान करती है। चयनित एथलीटों को राष्ट्रीय खेल विकास कोष (एनएसडीएफ) से अनुकूलित प्रशिक्षण और अन्य सहायता के लिए वित्त पोषण किया जाता है जो मंत्रालय की सामान्य योजनाओं के तहत उपलब्ध नहीं है। कोर ग्रुप के एथलीटों को प्रति माह 50,000 रुपये की दर से आउट ऑफ पॉकेट भत्ता (ओपीए) का भुगतान किया जाता है। ओपीए के अलावा, खिलाड़ी द्वारा प्रस्तुत प्रशिक्षण योजना का पूरा खर्च, मिशन ओलंपिक सेल (एमओसी) द्वारा विचार और अनुमोदित किया जाता है और टॉप्स के अंतर्गत पूरा किया जाता है। टॉप्स डेवलपमेंट ग्रुप के एथलीट को 25,000/- रूपये का ओपीए मिल रहा है।

3 राष्ट्रीय खेल महासंघों (एएनएसएफ) को सहायता योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) को एथलीटों के प्रशिक्षण के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है।  इसमें प्रशिक्षण, अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों में भागीदारी, राष्ट्रीय चैंपियनशिप का आयोजन, भारत में अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंटों का आयोजन, विदेशी प्रशिक्षकों/सहायक कर्मचारियों की नियुक्ति, वैज्ञानिक और चिकित्सा सहायता के लिए सभी अपेक्षित सहायता शामिल है।

4  पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय कल्याण कोष (पीडीयूएनडब्ल्यूएफएस) योजना के अंतर्गत सरकार खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, खेल उपकरणों की खरीद, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खेल आयोजनों में भागीदारी के लिए गरीबी में रहने वाले खिलाड़ियों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता (2.50 लाख रूपये तक) प्रदान करती है।

5 सरकार उत्कृष्ट खिलाड़ियों को एक सुनिश्चित मासिक आय प्रदान करने के उद्देश्य से मेधावी खिलाड़ियों को पेंशन की योजना के माध्यम से खेलों से उनकी सेवानिवृत्ति के बाद वित्तीय सहायता प्रदान करती है। वर्त्तमान योजना के तहत पात्र पूर्व खिलाड़ियों को ₹12,000/- से लेकर ₹20,000/- तक की मासिक पेंशन प्रदान की जाती है।

6  सरकार ने आर ई एस ई टी कार्यक्रम शुरू किया है, जिसका उद्देश्य सेवानिवृत्त खिलाड़ियों को एक अलग करियर के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल प्रदान करना है। यह कार्यक्रम लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान (एलएनआईपीई) के सहयोग से कार्यान्वित किया जा रहा है और स्व-गति ऑनलाइन शिक्षा, ऑन-ग्राउंड प्रशिक्षण और इंटर्नशिप का संयोजन प्रदान कर रहा है। इसके अतिरिक्त, प्रतिभागियों को सफलतापूर्वक पूरा होने पर प्लेसमेंट सहायता और उद्यमशीलता मार्गदर्शन प्राप्त होगा।

7 अंतर्राष्ट्रीय खेल आयोजनों में पदक विजेताओं और उनके कोचों को नकद पुरस्कार की योजना के अंतर्गत सरकार उत्कृष्ट खिलाड़ियों को उच्च उपलब्धियों के लिए प्रोत्साहित करने और प्रेरित करने और युवा पीढ़ी को खेलों को अपनाने के लिए प्रेरित करने के लिए नकद पुरस्कार प्रदान करती है। इस योजना के अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को 20,000/- से लेकर 75,00,000/- रूपये तक का नकद पुरस्कार दिया जाता है।

8 उपरोक्त योजनाओं के अलावा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले एथलीटों/खिलाड़ियों को सम्मानित करने के लिए, सरकार हर साल मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार, अर्जुन पुरस्कार और द्रोणाचार्य पुरस्कार जैसी विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत राष्ट्रीय खेल पुरस्कार भी प्रदान करती है।

यह जानकारी केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

 *****//एमजी/ केसी/एसके//(रिलीज़ आईडी: 2078668)

Tuesday, October 1, 2024

गांधी-जयंती: गुजरात के पोरबंदर में खेल की भावना से लगेगा स्वछता मेला

Posted on: 01 OCT 2024 3:05 PM by PIB Delhi युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय Azadi ka Amrit mahotsavg20-India-2023

केंद्रीय खेल मंत्री डा,  मनसुख मांडविया करेंगे अभियान का नेतृत्व

2 अक्टूबर को भारत के तटीय क्षेत्रों में सिंगल-यूज़ प्लास्टिक को हटाने के लिए 1,000 स्थानों पर माई भारत के 1,00,000 से अधिक युवा स्वयंसेवक जुटेंगे

स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत, माई भारत के 56 लाख से अधिक युवा स्वयंसेवकों ने पूरे भारत में लाखों किलोग्राम कचरा हटाया

नई दिल्ली: 01 अक्टूबर 2024:(PIB Delhi//खेल स्क्रीन डेस्क)::

X का सबंधित लिंक यहां है 
केंद्रीय युवा मामले एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया  कल महात्मा गांधी जयंती के अवसर पर गुजरात के ऐतिहासिक शहर पोरबंदर से माई भारत द्वारा आयोजित राष्ट्रव्यापी तटीय और समुद्र तट स्वच्छता अभियान का नेतृत्व करेंगे। इस विशेष अभियान का उद्देश्य भारत के समुद्र तटों और तटीय क्षेत्रों से सिंगल-यूज़ प्लास्टिक कचरे को खत्म करना है। "स्वच्छता ही सेवा" अभियान के समापन के अवसर पर यह कार्यक्रम आयोजित होगा। "स्वच्छता ही सेवा" अभियान 17 सितंबर से 2 अक्टूबर, 2024 तक "स्वभाव स्वच्छता-संस्कार स्वच्छता" थीम के तहत आयोजित किया गया है।

डॉ. मांडविया युवाओं की अगुवाई वाली पर्यावरण संरक्षण संबंधी गतिविधियों को बढ़ावा देने में सबसे आगे रहे हैं। वे महात्मा गांधी की जन्मस्थली के रूप में चर्चित ऐतिहासिक महत्व के स्थल पोरबंदर में स्वच्छता अभियान की शुरुआत करेंगे। केंद्रीय मंत्री डॉ. मांडविया की भागीदारी पर्यावरण संरक्षण के लिए सतत परंपरराओं के प्रति प्रतिबद्धता को उजागर करती है। यह अभियान स्वच्छ और सिंगल-यूज़ प्लास्टिक मुक्त भारत के दृष्टिकोण के निर्माण के अनुरूप है।

युवा मामलों के विभाग के अंतर्गत माई भारत ने इस वर्ष स्वच्छता ही सेवा अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई है। इसमें स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण संबंधी जिम्मेदारी को बढ़ावा देने में युवाओं की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित किया गया है। माई भारत के युवा स्वयंसेवकों के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर तटीय स्वच्छता अभियान 2 अक्टूबर, 2024 को स्वच्छ भारत दिवस के अवसर पर संपन्न होगा।

इस अभियान के अंतर्गत भारत के विशाल 7,500 किलोमीटर के तटीय क्षेत्र में 1,000 से अधिक स्थानों पर स्वच्छता का उद्देश्य है। इसमें विशेष रूप से सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के संग्रह, उन्हें अन्य कचरों से अलग करने और निपटान पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। माई भारत के 1,00,000 से अधिक स्वयंसेवक इस राष्ट्रव्यापी समुद्र तट स्वच्छता अभियान में भाग लेंगे। इस अभियान के माध्यम से दीर्घकालिक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक कार्रवाई की शक्ति प्रदर्शित होगी।

केंद्रीय मंत्री डॉ. मांडविया ने सभी तटीय ज़िलों के सांसदों को पत्र लिखकर उनसे स्वच्छता ही सेवा अभियान में भाग लेने का आग्रह किया है।

इस वर्ष स्वच्छता ही सेवा अभियान को पहले ही अभूतपूर्व सफलता मिली है। इसमें 30 सितंबर, 2024 तक 56 लाख से अधिक माई भारत के युवा स्वयंसेवक सक्रिय रूप से देश भर में लाखों किलोग्राम कचरे को हटाने में जुटे रहे हैं। स्वच्छता के ये प्रयास 1 लाख से अधिक गांवों 15,000 से अधिक सामुदायिक केंद्रों, 9,501 अमृत सरोवरों और विभिन्न ऐतिहासिक और सार्वजनिक स्थानों तक में हो रहे हैं।

यह ऐतिहासिक पहल स्वच्छ भारत मिशन के प्रति युवाओं के समर्पण को दर्शाती है,  और भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रभावशाली उदाहरण प्रस्तुत करती है। तटीय स्वच्छता का प्रयास इस महात्मा गांधी के सपने से जुड़े उस संदेश की पुष्टि करता है कि स्वच्छ भारत की शुरुआत सामूहिक कार्रवाई से होती है।

******//एमजी/आरपीएम/केसी/केके/एनजे//(रिलीज़ आईडी: 2060677) 

Friday, September 6, 2024

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने याद किया हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद को

Posted on: 06 SEP 2024 10:59AM by PIB Delhi//युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय//azadi ka amrit mahotsavg20-india-2023

जयंती के अवसर पर किया "खेल उत्सव 2024" का आयोजन

 मंत्रालय के 200 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों ने जोश एवं उत्साह के साथ भाग लिया

नई दिल्ली: 06 सितंबर 2024: (पीआई बी दिल्ली//खेल स्क्रीन डेस्क)::

मेजर ध्यानचंद की जयंती के उपलक्ष्य में युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के राष्ट्रीय खेल दिवस 2024 समारोह के अनुसरण में, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 27 अगस्त, 2024 से 30 अगस्त, 2024 तक मेजर ध्यानचंद स्टेडियम और जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम, नई दिल्ली में "खेल उत्सव 2024" का आयोजन किया।

अपने पहले संस्करण में मंत्रालय ने चार खेलों अर्थात क्रिकेट, हॉकी, बैडमिंटन और टेबल टेनिस में टूर्नामेंट आयोजित किए। इस आयोजन को सफल बनाने के लिए मंत्रालय के 200 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी पूर्ण जोश और उत्साह के साथ इसमें शामिल हुए। मंत्रालय का लक्ष्‍य खेल उत्सव के आगामी संस्करणों में और अधिक खेलों को शामिल करना है।

मेजर ध्यानचंद ट्रॉफी का वितरण समारोह 4 सितंबर, 2024 को नई दिल्‍ली स्थित शास्त्री भवन के पत्र सूचना कार्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित किया गया। ट्रॉफी वितरण समारोह के अवसर पर, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव श्री संजय जाजू और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

***//एमजी/एआर/एसएस/ओपी//(रिलीज़ आईडी: 2052446)

Monday, September 2, 2024

गोल्डन पंच > डॉ. बलवंत सिंह संधू द्वारा लिखित एक बॉक्सिंग खेल उपन्यास

 रविवार 1 सितंबर 2024 रात्रि 11:37 बजे

लुधियाना कॉलेज एलुमनाई एसोसिएशन ने दी इस बॉक्सिंग नॉवेल के लिए दी बधाई 


लुधियाना: 01 सितंबर 2024: (*ब्रिज भूषण गोयल//खेल स्क्रीन)::

ऐसे क्षेत्र में जहां भारत में खेल लेखकों की कमी है और प्रतिस्पर्धी खेलों में देश के एथलीटों और खिलाड़ियों का प्रदर्शन अभी भी चीन, जापान, इंग्लैंड, अमेरिका आदि के बराबर नहीं है, प्रिंसिपल डॉ. बलवंत सिंह जैसे कुछ उत्साही खेल प्रेमी और शिक्षाविद् हैं। संधू जो अपने खेल लेखन के माध्यम से आशा को जीवित रखे हुए हैं जो हमेशा युवाओं को प्रेरित करता है।

उनकी नवीनतम उपलब्धि में, डॉ. संधू की पुस्तक गोल्डन पंच - प्रसिद्ध पंजाबी-भारतीय मुक्केबाज कौर सिंह के जीवन पर आधारित एक प्रेरणादायक खेल उपन्यास है, जो अब एक शैक्षणिक घटक है, जब इसे गुरु नानक में बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन के पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाएगा। देव विश्वविद्यालय. वर्ष 2024 से 2027 तक बीपीईएस डिग्री कक्षा में पंजाबी भाषा के अनिवार्य विषय में डॉ. संधू ने महान भारतीय मुक्केबाज कौर सिंह के जीवन को दर्शाया है, जिन्होंने पंजाब के संगरूर जिले से एक किसान के रूप में अपना करियर शुरू किया था। कौर सिंह ने पहले भारतीय सशस्त्र बलों और मुक्केबाजी में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, एशियाई खेलों और अन्य अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीते, और बाद के वर्षों में खेती में लौटने से पहले उन्हें पद्म श्री और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह दिलचस्प किस्सों के साथ यात्रा को अच्छी तरह से चित्रित करता है जो उपन्यास पढ़ते समय खेल मुक्केबाजी के छल्ले और ग्रामीण क्षेत्रों को जीवंत कर देता है।

एससीडी गवर्नमेंट कॉलेज के पूर्व छात्र डॉ. बलवंत सिंह संधू, जो अब श्री गुरु अंगद देव कॉलेज, खडूर साहिब, पंजाब के प्रिंसिपल हैं, लुधियाना में अपने अल्मा मेटर में एक शानदार खिलाड़ी रहे हैं। लुधियाना कॉलेज के पूर्व छात्र संघ के आयोजन सचिव बृज भूषण गोयल ने डॉ. संधू को बधाई दी है और सभी पूर्व छात्रों ने कॉलेज के एक उत्कृष्ट एथलीट पर गर्व महसूस किया है। केन्द्रीय विद्यालय उदयपुर के पूर्व प्राचार्य एवं लुधियाना कॉलेज के पूर्व छात्र एवं प्रख्यात खिलाड़ी मंजीत सिंह संधू ने कहा कि डॉ. बलवंत संधू की पुस्तकें एक अनूठा प्रयास है जिसका अन्य भाषाओं में भी अनुवाद किये जाने की आवश्यकता है। डॉ. बलवंत सिंह संधू, लेखक खडूर साहिब के एक कॉलेज में प्रिंसिपल हैं। डॉ. संधू ने 'गुमनाम चैंपियन' और 'एक पिंड दी खेल गाथा-पिंड चक्र' नाम से 2 अन्य किताबें भी लिखी हैं, जिन्हें खेल जगत ने भी काफी पसंद किया है।

* बृज भूषण गोयल एक सक्रिय समाज सुधारक, स्वतंत्र लेखक और वरिष्ठ पत्रकार होने के साथ-साथ एससीडी गवर्नमेंट कॉलेज, लुधियाना के पूर्व छात्र संघ के आयोजन सचिव भी हैं। उनका मोबाइल फोन संपर्क नंबर है: +91 94176 00666

Sunday, September 1, 2024

केंद्रीय मंत्री श्रीमती रक्षा खडसे ने महिला जूडो लीग में आत्मरक्षा पर जोर दिया

Posted on: 01 SEP 2024 4:17 PM by PIB Delhi

नासिक में अस्मिता जूडो लीग में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया

नई दिल्ली:01 सितंबर  2024:(पी आई बी दिल्ली//खेल स्क्रीन डेस्क)::

ऐसे समय में, जब महिलाओं ने देश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान जीतने में अग्रणी भूमिका निभाई है, केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खडसे ने महिलाओं के लिए उचित कौशल सीखकर खुद को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है।

श्रीमती खडसे रविवार को पंचवटी के मीनाताई ठाकरे स्टेडियम में अस्मिता जूडो लीग, पश्चिमी क्षेत्र के अवसर पर लोगों को संबोधित कर रही थीं। यह लीग युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के खेल विभाग की एक पहल है, जिसे खेलो इंडिया के महिला खेल प्रभाग के तहत भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा संचालित किया जा रहा है।

अस्मिता जूडो लीग की चार श्रेणियों में कुल 800 प्रतियोगी भाग ले रहे हैं: सीनियर, जूनियर, कैडेट और सब-जूनियर। यह आयोजन 31 अगस्त को शुरू हुआ और 3 सितंबर को समाप्त होगा।

जहां यह महिलाओं को खेल खेलने का अवसर प्रदान करता है, वहीं अस्मिता लीग एक खेल गतिविधि के माध्यम से युवा महिलाओं में सामाजिक जागरूकता लाने और उनमें आत्मविश्वास की भावना पैदा करने का भी प्रयास है।

श्रीमती खडसे ने कहा कि जूडो आत्मरक्षा का कौशल सीखने का एक तरीका है। मंत्री ने कहा, "आज की दुनिया में, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के लिए आत्मरक्षा सीखना बहुत महत्वपूर्ण है। आज ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां आप खुद की रक्षा नहीं कर सकते।"

सभी तरह के समर्थन का वादा करते हुए उन्होंने कहा कि कम उम्र से ही आत्मरक्षा कौशल सीखना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, "मंत्रालय यह सुनिश्चित करेगा कि अस्मिता कार्यक्रम महासंघों, कोचों और खिलाड़ियों को सभी तरह का समर्थन प्रदान करे। मैं शिक्षा मंत्रालय के साथ इस बात पर भी चर्चा करूंगी कि इस कार्यक्रम को सभी स्कूलों तक कैसे पहुंचाया जाए।"

महिलाओं के जूडो लीग, पश्चिमी क्षेत्र ने राजस्थान से लेकर मध्य प्रदेश तक और गोवा से लेकर दमन और दीव तक तथा अन्य राज्यों के बच्चों को भी आकर्षित किया है। केंद्रीय मंत्री ने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को बड़ी संख्या में ऐसी गतिविधियों में भाग लेने दें।

इस महिला जूडो लीग में काफी प्रतिस्पर्धा है, क्योंकि इसमें 4.26 लाख रुपये के नकद पुरस्कार जीते जा सकते हैं।

***//एमजी/एआर/जेके/एसएस//(रिलीज़ आईडी: 2050665)

Wednesday, August 21, 2024

भारत और विदेशों में तीरंदाजी का इतिहास बहुत पुराना है।

भारत और विदेशों में तीरंदाजी का इतिहास बहुत पुराना है। हालाँकि आधुनिक युग में इसका सैन्य महत्व उतना अधिक नहीं माना जाता है, लेकिन यह अभी भी निशानेबाजी के अभ्यास में रुचि रखने वाले युवाओं को आकर्षित करता है। यह अभी भी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खेल आयोजनों का हिस्सा है। तो तीरंदाजी आज भी एक उज्जवल करियर प्रदान करती है।

भारत में तीरंदाजी का इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा हुआ है। रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों में तीरंदाजी का उल्लेख मिलता है। भगवान राम, अर्जुन और एकलव्य जैसे पात्र तीरंदाजी के महान योद्धा थे। प्राचीन भारतीय योद्धाओं के लिए तीरंदाजी युद्ध का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी। तीरंदाजी का इस्तेमाल न केवल युद्ध में बल्कि शिकार और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में भी किया जाता था।

विदेशों में भी तीरंदाजी का इतिहास समृद्ध है। प्राचीन मिस्र, ग्रीस और चीन में तीरंदाजी का इस्तेमाल युद्ध और शिकार दोनों के लिए किया जाता था। मध्य युग में, तीरंदाजी यूरोप में एक प्रमुख मार्शल आर्ट थी। मंगोल साम्राज्य के समय में, घुड़सवार सेना की लड़ाई में तीरंदाजी का बहुत प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जाता था। जापान में, क्यूडो (जापानी तीरंदाजी) को एक आध्यात्मिक और मार्शल आर्ट माना जाता है।

आधुनिक युग में तीरंदाजी का सैन्य महत्व अभी भी जारी है और युवाओं को आकर्षित कर रहा है। आधुनिक युग में तीरंदाजी का सैन्य महत्व कम हो गया है क्योंकि आग्नेयास्त्रों और अन्य आधुनिक हथियारों ने इसकी जगह ले ली है। हालांकि, तीरंदाजी का उपयोग अभी भी कुछ विशेष बलों में मूक लक्ष्य शूटिंग के लिए किया जाता है। इसके अलावा, तीरंदाजी का उपयोग सैन्य प्रशिक्षण और अनुशासन को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है। तीरंदाजी में करियर अभी भी उज्जवल है। आज के समय में तीरंदाजी एक खेल के रूप में विकसित हुई है और इसका बहुत महत्व है। यदि आप तीरंदाजी में करियर बनाना चाहते हैं, तो इसके कुछ प्रमुख अवसर निम्नलिखित हैं: खिलाड़ी: आप एक पेशेवर तीरंदाज बन सकते हैं और राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, जैसे ओलंपिक, एशियाई खेल और अन्य विश्व स्तरीय टूर्नामेंट में भाग ले सकते हैं। कोच: तीरंदाजी कोच बनकर आप नए खिलाड़ियों को प्रशिक्षित कर सकते हैं और उनके कौशल का विकास कर सकते हैं। खेल विज्ञान और अनुसंधान: आप तीरंदाजी के वैज्ञानिक पहलुओं, जैसे बायोमैकेनिक्स, मनोविज्ञान और अन्य शारीरिक प्रशिक्षण तकनीकों पर शोध कर सकते हैं। आउटडोर और साहसिक गतिविधियों में करियर: तीरंदाजी को एक साहसिक खेल और रचनात्मक गतिविधि के रूप में भी देखा जाता है। इस क्षेत्र में भी करियर के अवसर हैं।

प्रमोटर और आयोजक: आप तीरंदाजी प्रतियोगिताओं के आयोजन और प्रचार में अपना करियर बना सकते हैं।

अगर आप तीरंदाजी में रुचि रखते हैं, इसे शौक या करियर के तौर पर अपनाना चाहते हैं, तो ऐसे कई संस्थान और क्लब हैं, जहां आप प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं और प्रतियोगिताओं में भाग ले सकते हैं।